प्रतिनिधि सभा स्थगित ..

अखिल भारतीय श्री ब्राह्मण स्वर्णकार महासभा के महामंत्री श्री गोविन्दप्रकाश भजूड ने स्वर्ण जागृति पत्रिका को sms द्वारा यह जानकारी दी है कि आगामी
दिनांक 17/18 नवंबर 2012 को सादडी- जिला पाली में आयोजित प्रतिनिधि सम्मेलन अनिवार्य कारणों के रहते स्थगित किया गया है|

नई तिथि की घोषणा यथा समय कर दी जायेगी |

First Dr. Of Our society… डो. गोविंदरामजी हेडाऊ..

Dr. Shri. Govindramji Herau, समाज के प्रथम डो. श्री गोविंदरामजी का जन्म सादडी में श्री अनोपचंदजी के यहां 28 अक्टूबर, 1894, को माता श्रीमती मणिबाई की कोख से हुआ था । श्री अनोपचंदजी की आठ संतानो में गोविंदरामजी सबसे बडे थे । वे मितभाषी व मिष्टभाषी दोनों थे । पिता ने पुत्र की योग्यता को भांप कर उन्हे शिक्षा के लिये जोधपुर भेजा, उसके बाद अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुये भी आपने इंदोर से एल. एम. पी. की उपाधि प्राप्त की ।

वहां से लौटने पर आपकी नियुक्ति राजकिय चिकित्सा विभाग के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के लिये हुई । इसमें प्रति मास एक निश्व्चित कार्यक्रम होता था, और जो मिले, उसी वाहन पर गांव मे जाना पडता था । दस वर्षों की ऍसी कष्टमयी सेवा के उपरान्त आपकी नियुक्ति जोधपुर के महिलाबाग चिकित्सालय में हुई। यहीं से “जिवाणु विज्ञान” में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये आप कलकत्ता भेजे गये और वहां से लौटने पर चिकित्सकीय अनुसंधान व प्रयोगशाला को सुव्यवस्थित कर अपनी कुशलता व विश्वसनीयता का परिचय दिया ।

इसके बाद आपकी नियुक्ति वर्तमान महात्मागांधी अस्पताल में हुई । वहां आपके सदव्यवहार, सेवा व लगन की सुवास सर्वत्र फैली । यही कारण था कि मारवाड राज्य के चुनंदे जागीरदार, राज परिवार के सदस्य. व्यापारीगण तथा साधारण जन बडी मात्रा में इनके यहां चिकित्सार्थ आने लगे । चौंतीस वर्षो की सुदीर्ध सरकारी सेवा के पश्व्चात आप निवृत हो कर अपने निवास स्थान पर ही दीन दुखियों की अति कम फीस पर सेवा करने लगे । तत्कालीन महाराजा हनुवंतसिंहजी जब सरदारसमंद में बीमार थे तो डो. गोविंदरामजी नित्य शाम वहां जाया करते थे । उनके लिये विशेष मोटर तैनात थी ।

समाज की पिछडी दशा से आप पुर्ण परिचित थे और मानते थे कि विना शिक्षा के उद्धार नहीं हो सकता है । इसी पूत भावना से प्रेरित होकर आपने सन 1928-29 में ब्राह्मण स्वर्णकारों के महोल्ले में शिक्षा प्रसार हेतु रात्रि पाठशाला प्रारम्भ की । अपने अनुज श्री अमृतलालजी को वहां पढाने का कार्य सोंपा गया और घाटी पर एक नई पाठशाला खोलकर स्वयं पढाने लगे ।

ब्राह्मण स्वर्णकार महासभा के जोधपुर अधिवेशन के स्वागत समिति के आप कोषाध्यक्ष चयनित हुए थे तथा महासभा द्वारा उदघाटित प्राईमरी स्कुल के संचालन के लिये जिन दो व्यक्तियों को नियुक्त किया गया था, उनमे एक तो डॉ. साहब स्वयं थे और दुसरे थे पं. बदरीप्रसादजी साकरिया । जौहरी हरिरामजी बाडमेरा (घाटोपर) द्वारा पचास रुपये मासिक तक की आर्थिक सहायता से डो. साहब स्कुल का संचालन व निरिक्षण करते थे ।

आप ही ने सर्वप्रथम यह सूचना दी थी कि सादडी मे एक शिलालेख है, जिसमें हाथी पर सवार होकर तोरण बांधने आये दुल्हे की हत्या की गई थी । इसकी तलाश करने के लिए आचार्यजी ने बीसों प्रयत्न किये, पर समाज की गफलत से उसका पता अब तक नही चल रहा है । स्वर्णप्रभा के एक लेख में श्री चतुर्भजजी जिज्ञासु ने इसके होने का समर्थन किया था ।

इकहत्तर वर्ष की अवस्था में मस्तिष्क में रक्त-स्त्राव के कारण दिनांक 18 दिसम्बर 1966 को आपका देहावसान हो गया ।

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Details from : “तपोनिष्ठ ब्राह्मणों का ईतिहास” page no.43 /44

Photograph : From Rare Collection of Shri Bhupatiramji Sakariya – Vidhyanagar [Guj.]

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Note : If you have any information and real photographs of any great person of our society, please let us send on contact@brahminswarnkar.com or on following address, it will be published here with The Collectionist name.

अगर आपके पास समाज के कोई भी महान प्रतिभा विशेष के बारे मे जानकारी एवं तस्वीर हो, तो आपसे निवेदन है कि समाज के हित में समाज की जानकारी के लिये उपलब्ध करायें. आप उसे निम्न-लिखित E-mail पर, फोन, या पोस्ट से भेज सकते है ।

Soni Sunderlal Prahladji

283/6, Bawa’s Dehla, Opp; Premdarwaja,

Ahmedabad, Gujarat – INDIA -380002

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