किराडू में ०५-०२-२०१२ को बाड़मेरा गोत्र के भाईपा सम्मेलन का आयोजन सम्पन्न …

ब्राह्मण स्वर्णकार समाज के बाड़मेरा गौत्र की कुलदेवी मां चामुंडा माता मंदिर किराड़ू में रविवार को तेरस पर बाड़मेरा गोत्र के भाईपा सम्मेलन का आयोजन हुआ।

इस अवसर पर भरे मेले में गौत्र बंधुओं ने शिरकत कर कुलदेवी मां चामुंडा की आराधना कर कुल रक्षा के साथ अमनचैन और खुशहाली की कामना की। मां चामुंडा का फूल माला से आकर्षक शृंगार किया। यज्ञ में देवी भक्तों ने श्रद्धा से आहुतियां देकर कुल रक्षा की मन्नत मांगी।

शंख-घंटियों की करतल ध्वनि से आरती उतारी गई जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया। मेले में किराड़ू सहित दूरदराज से आए श्रद्धालुओं की रेलमपेल रही।

स्नेह मिलन के दौरान बैठक में चामुंडा माता के दर्शनार्थ बाहर से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए गौत्र बंधुओं के स्वयं की धर्मशाला निर्माण पर चर्चा की जिसमें सबसे पहले शंकरलाल बाड़मेरा ने ट्रस्ट को भूमि देने की घोषणा की। उसे बाद एक के बाद एक राजस्थान सहित अन्य राज्यों से आए बाड़मेरा गौत्र बंधुओं ने कमरा निर्माण सहित पानी हौद बनवाने की घोषणा की।

– भास्कर न्यूज

श्री कुलदेवी चामुन्डा माता बाडमेरा गोत्र केराडू जिला-बाडमेर दिनांक ५.०२.२०१२ रविवार का अखिल भारतीय बाडमेरा गौत्रका भाइपा सम्मेलन……..

बाडमेरा गोत्र भाईपा सम्मेलन दि. ५ फरवरी को

श्री चामुण्डा माता ट्रस्ट-केराडू , की कार्यकारिणी की मीटिंग दि. १६/१२/२०११ को रखी गई. इस मीटिंग में सर्व सम्मति से गत वर्ष की तरह अखिल भारतीय बाडमेरा गोत्र का भाईपा सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया.

निर्णय के अनुसार दि. ४/०२/२०१२ शनीवार को रात्रि जागरण होगा. दि. ५/०२/२०१२ रविवार को प्रातः आरती व भोग लगाया जायेगा. तत्पश्व्यात महाप्रसादी आरंभ होगी. महाप्रसादी की समाप्ति पर भाईपा समेलन  शुरु होगा. इस सम्मेलन में केराडू मंदिर निर्माण के लिये अब तक की गतिविधियों की जानकारी उपस्थित भाइयों को दी जायेगी, व भविष्य में किये जाने वाले कार्यों के संबंध में विचार विमर्श होगा.

दि. ४/०२/२०१२ को सायं ६ बजे स्थानीय ”श्री ब्राह्मण स्वर्णकार न्याति नोहरा” ढाणी बाजार, बाडमेर से निशुल्क बस व्यवस्था की गई है.  दि. ५/०२/२०१२ को बाडमेर से केराडू आने जाने के लिये बसों की व्यवस्था रखी गई है.

समस्त बाडमेरा गोत्र भाइयों से निवेदन है कि इस सम्मेलन में अधिक से अधिक सहपरिवार पधार कर मंदिर निर्माण में सहयोग प्रदान करें.

प्रेषक- मोहनलाल सोनी, बाडमेर

दि. 16-02-2011, बाड़मेरा गौत्र- ब्राह्मण स्वर्णकार समाज किराडु स्थित कुलदेवी माता मंदिर में बुधवार को ब्राह्मण स्वर्णकार बाड़मेरा गौत्र का भाईपा सम्मेलन सम्पन्न हुआ।.

किराडु स्थित कुलदेवी माता मंदिर में बुधवार को ब्राह्मण स्वर्णकार बाड़मेरा गौत्र का भाईपा सम्मेलन आयोजित हुआ। राजस्थान सहित मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात से आए भक्तों ने कुलदेवी चामुंडा माता के मंदिर में शीश नवा सुख-समृद्धि की कामना की।भाईपा सम्मेलन को लेकर समाज के बंधुओं ने आपस में गले मिल एक दूसरे के हालचाल जाने,वहीं अन्य प्रदेश से आए गौत्र बंधुओं से मुलाकात कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

सम्मेलन को लेकर गौत्र बंधुओं में काफी उत्साह रहा,स्वजातीय बंधुओं ने माता के मंदिर को रंगबिरंगी रोशनी से सजाया । चामुंडा माता के दर्शन को लेकर देर तक भक्तों की कतार लगी रही। सम्मेलन की पूर्व संध्या पर रात्रि जागरण का आयोजन हुआ जिसमें कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए,इस अवसर पर आयोजित महाआरती व हवन में कई जोड़ों ने आहुतियां देकर माता से प्रदेश व समाज में खुशहाली की कामना की। समाज की ओर से भक्तों में महाप्रसादी का वितरण किया गया।

भारत सरकार गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव विश्वेंद्र सिंह एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के दीपक दईया ने मां चामुंडा के दर्शन कर देश-प्रदेश व समाज के लिए खुशहाली की कामना की। इस मौके बाड़मेरा गौत्र स्वर्णकार ट्रस्ट किराडु के अध्यक्ष बाबूलाल सोनी, सचिव मोहनलाल सोनी, सह सचिव शिव प्रकाश सोनी ने उनका माल्यार्पण कर मां की तस्वीर एवं श्रीफल भेंट कर जोरदार स्वागत किया।

source : D.bhaskar

ब्राह्मण स्वर्णकार कुलभूषण प. पू. श्री धर्मसीजी बाड़मेरा

ब्राह्मण स्वर्णकार कुलभूषण

प. पू.  श्री धर्मसीजी बाड़मेरा

हर जाति के जीवन में ऐसे युग निर्माता अवतरित होते हैं जो उसके हर क्षेत्र की कायापलट कर, अक्षय कीर्ति के भागी बनते हैं। वर्तमान में बाडमेर से 30 कि.मी. दूर जूना केराडू में गौतम गोत्रीय तपोनिष्ठ देवराजजी के कुल में उत्पन्न श्री धर्मसीजी यथा नाम तथा गुण वाले ऐसे धर्मनिष्ठ तथा प्रतिभाशाली कुल-दीपक हुये, जिन्होंने अपने नाम के साथ-साथ समाज को भी समुज्जवल किया। पिताश्री देवराजजी धर्मसीजी के विवाह के पश्चात देवलोक हो गये, पर धर्मसीजी ने अपने पिताजी की दीन दुःखियों की सेवा और साधु संतों की आवभगत की परंपरा को एक व्रत की भाँति निबाहा। एक दिन एक तपस्वी महात्मा उनकी पेढ़ी के सामने रूके। उनको देखते ही धर्मसीजी हाथ पर के सारे कार्य छोड़ कर महात्मा के स्वागतार्थ उठे। उनकी सेवा से साधु बड़े सन्तुष्ट हुये और सदकार्यों के निर्वाह हेतु एक दिव्यमणि प्रदान कर वहाँ से चल गये।

धर्मसीजी इस मणि से अपार वैभवशाली बने। सामान्यतः धन मनुष्यों को घमण्ड़ी बना देता है, पर इससे ठीक विपरीत यह वैभव धर्मसीजी को अपने रास्ते से च्युत न कर सका। वे और अधिक विनम्र भाव से सबकी सेवा करते रहे, उस वृक्ष के समान जो फलों से लदने पर और झूक जात है।

जब उन्होंने देखा कि समाज कुरीतियों से ग्रसित हो गया है और विशेषकर कन्या विक्रय के दूषण से तो वे अत्यन्त क्षुब्ध हुए। उन्होंने संकल्प किया की इस और इस जैसी अनेक कुरीतियों को दूर कर समाज को उन्नत बनाना ही होगा। इस कुप्रथा के कारण अनेक कन्याएँ अविवाहित रह गईं। उन्होंने इन सारी कन्याओं के विवाह बड़ी धामधूम से कर समाज के असंपन्न लोगों की सहायता की, परन्तु इससे भी उन्हें शांति नहीं हुई।

धर्मसीजी के काल के पूर्व तक तो समाज की गोत्र व्यवस्था व्यवस्थित रुप से चल रही थीं, पर समाज में अशिक्षा के कारण अनेक कुरीतियाँ प्रवेश कर गई। धर्मसीजी ने स्व खर्च से समाज का एक सम्मेलन बुलाकर उन कुप्रथाओं को दूर करने का प्रयत्न किया। साथ ही उन्होंने अनुभव किया कि मात्र 9 गौत्रों के कारण वैवाहिक कार्यों में कठिनाइयाँ आ रही हैं। अतएव इसी सम्मेलन में सबकी सम्मति तथा सुगमता की दृष्टि से 9 गोत्रों को 84 खाँपों (अल्ल या अवटंक) में विभाजित कर दिया। वह शुभ दिन अक्षय तृतीया संवत 759 बुधवार था।

उन्होंने समग्र नगर के हितार्थ “जूना केराडू” (वर्तमान में बाड़मेरा से 30 की.मी. दूर) के बाहर चौरंग नाम की बावली तथा देवी का एक मंदिर बनवाया।

ये दोनों आज भी (खण्ड़हर रुप में) उनकी कीर्तिगाथा की ध्वजा फहराती हुई विद्यमान हैं। समाज को चाहिये कि वे इन दोनों स्थलों की देखभाल करे।

(सौजन्यः डॉ. भूपतिरामजी साकरिया – लिखित पुस्तक “तपोनिष्ठ ब्राह्मणों का इतिहास” से उर्द्युत)

श्री धर्मसीजी द्वारा स्थापित गोत्रों का विवरण

क्रम   – गोत्र –    अल्लखाँप अथवा प्रचलित गोत्र

1     अत्रि –        साकरिया, मण्डोरा, मथरिया, मोदेसरा, भोजाल, भीनमाला, कोटडिया, नथमल, कथीरिया, भाटी

2     कश्यप –   काला, भजूड, बूचा, कठडिया, सोलंकी, कुंभलमेरा, पालडीवाल, लखपाल, पालीवाल

3     कौशिक–   छापरवाल, बेडचा, चौहाण, पवार, गहलोत, सिंघल, नाथडा, हथेलिया, कटारिया, आमलिया

4     गौतम –    बाडमेरा, लाडनवाल, धांधल, झोडोलिया, हाडा, लोलग, आसोपा, खेजडिया, पणधारी

5    पाराशर – महेचा, चित्रोडा, श्रीश्रीमाल, भोगल, मणिहार, चोवटिया, छ्तराला,

तांबेडा, पोमल

6     भारद्वाज –  कट्टा, जालोरा, जोजावरा, परमार, देवल, मंडलीवाल, गोयल, रायपाल, मंडलिक, मूथा

7     वत्सस –    हेडाउ, राठोड, वीसा, रुपसी, रुहाडा, बडगाँवा, दिया, बीजाणी, रतनपुरा, रमीणा

8     वशिष्ठ –      जसमतिया, डुंगरवाल, लायचा, गढेचा, ईडरिया, भूपाल, भागीजा, बरतडा, लोरका

9     हरितस –    खटोर, राडा, मेवाडा, ईया, सरवाडिया, नूनेचा, बुधमाटी, आमथलिया

रेफ. ( श्री ब्राह्मण स्वर्णकार समाज ( द.म.क्षेत्र), द्वितीय जनगणना, सन् 2005, प्रकाशक – सामूहिक विवाह समिति, से साभार)