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ज्योतिर्धर श्री बंशीधरजी जडिया…..

Thu, Jan 26, 2012

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आपका जन्म २९ नवंबर १९०६ को रतलाम में ननिहाल में हुआ था. दादा श्री रामबख्शजी रामभक्त व कथाकार थे तो पिता श्री नंदरामजी स्वाश्रयी, कठोर परिश्रमी व विविध व्यवसायों को जानने वाले गुणी व्यक्ति थे.उन्होंने स्कूल के कभी दर्शन तक नहीं किये, किन्तु आपने बच्चों को उच्चतम शिक्षा दिलाई. श्री बंशीधरजी ने अपने पिता के इस आदर्श वाक्य को हृदयंगम कर लिया था कि ऋण लेकर कभी कोई कार्य्‌ नहीं करना, सदैव सत्य बोलना व आध्यात्मिक चिंतन करना! यह मूलमंत्र असफलता के दिनों में उन्हें ढाढस देता और अवरोधों को दूर करने की प्रेरणा देता.

बचपन में जडाई का कार्य करना पडा. डॉ. जयदेव प्रसादजी शर्मा की प्रेरणा से १९ वर्ष की बडी उम्र में फिर से स्कूल जाना शुरु किया. आगे चलकर इन्हीं डॉ. साहब के चाचा श्री दौलतरामजी की पुत्री से सन्‌ १९२८ में विवाह हुआ. पर पढना न छोडा. अनेक शारीरिक, आर्थिक व मानसिक कठिनाइयों के बावजूद आपने बनारस विद्यवविध्यालय से एल.एल.बी.(१९३३) तथा सन १९३४ में एम.ए.(अंग्रेजी) में द्वितीय श्रेणी में पास किया. आपने वकालत शुरु की पर असत्य का रास्ता होने के कारण उसे शीघ्र ही तिलांजलि दे दी. जडत व वकालत के कार्यों को उन्होंने खड्‌डे से निकल कर कुंए में गिरने के समान बतलाया है. अंततः आपने स्थानीय मिल में सुपरवाईजर की नौकरी कर ली. सन १९५६ से १९५९ के चार वर्षो की अवधि में इन्हें कई छोटी मोटी नौक्ररियाँ करनी पडीं और अंत में १९६० से १९८५ तक घर पर ही अध्यापन का कार्यखूब  परिश्रम पूर्वक कर जीवन निर्वाह किया.  परिणामस्वरुप घुटने बेकार हो गये.

अंग्रेजी में एम.ए. और एल.एल.बी. होते हुए भी हिन्दी साहित्य के प्रति आपकी रुचि प्रारंभ से थी. किशोरावस्था में ब्यावर हिन्दी समिति की स्थापना की और आपको उसका मंन्त्री निर्वाचित किया गया. अपने मन्त्रित्वकाल में आपने हिन्दी के अनेक विद्वानों को आमन्त्रित कर हिन्दी के प्रचार प्रसार में बडा योगदान दिया. यही अभिरुचि आगे जाकर पल्लवित व पुष्पित हुई और एक काव्य संग्रह ”ज्योति किरण” तथा एक निबन्ध संग्रह ”गहरे पानी पैठ” से आपने हिन्दी साहित्य की श्रीवृद्धि की. आधुनिक हिन्दी के निबन्ध संग्रहों में यह उनकी गणना पात्र कृति है.

अध्यवसाय की प्रतिमूर्ति, कवि व लेखक निष्ठावान व ईमानदार तथा स्वाश्रयी जीवन के उद्‌घोषक श्री बंशीधरजी हमारे समाज के एक ज्योतिर्धर थे. ८ जनवरी, १९८७ को उनके निधन से समाज को ऐसी भारी हानि हुई है, जिसकी पूर्ति असंभव है.

आपके बडेपुत्र श्री सत्यप्रकाश कस्यप ‘लार्सन एन्ड टुर्बो’ जैसी बडी कम्पनी के बोर्ड ओफ डिरेक्टर्स के वाइस चेरमेन है.

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Details from : “तपोनिष्ठ ब्राह्मणों का ईतिहास” page no.69 /70

Photograph from : स्वर्णप्रभा

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Note : If you have any information and real photographs of any great person of our society, please let us send on contact@brahminswarnkar.com or on following address, it will be published here with The Collectionist/provider name.

अगर आपके पास समाज के कोई भी महान प्रतिभा विशेष के बारे मे जानकारी एवं तस्वीर हो, तो आपसे निवेदन है कि समाज के हित में समाज की जानकारी के लिये उपलब्ध करायें. आप उसे निम्न-लिखित E-mail पर, फोन, या पोस्ट से भेज सकते है ।

Soni Sunderlal Prahladji

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