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अखिल भारतीय श्री ब्राह्मण स्वर्णकार महासभा-स्थापना काल से अब तक…….

Sun, Jul 25, 2010

Mahasabha

अखिल भारतीय श्री ब्राह्मण स्वर्णकार महासभा

नव निर्वाचित कार्यकारिणी – दि. 25/10/2009

अध्यक्ष श्री भँवरलालजी कठडिया – नागौर

वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री श्यामकमलजी शर्मा – जोधपुर

उपाध्यक्ष     –           श्रीमती मनीषा मधुसुदनजी बाडमेरा (आर्य) बीकानेर

महामंत्री      –           श्री गोविन्द प्रकाशजी भजूड – नागौर

कोषाध्यक्ष    –          श्री रामेश्वरजी बाडमेरा – नागौर

संयुक्त सचिव  -

1)    श्री किशनलालजी सोनी      –     जैसलमेर

2)    श्री देवेन्द्रकुमारजी बूचा      –     जोधपूर

3)    श्री सुरेशकुमारजी महेचा     –     बीकानेर

4)    श्री महेन्द्रकुमारजी कट्टा    –     बीकानेर

संगठन मंत्री –     श्री हीरालालजी कट्टा       –     जोधपुर

प्रचार मंत्री    –     श्री पुरुषोत्तमजी बूचा        –     अजमेर

Mahasabha – Main Body

कार्यकारिणी सदस्य   –     सर्वश्री

1          हेमेन्द्र कुमार काला                     – व्यावर

2          मोहनलाल मथुरिया                   – जैसलमेर

3          पवन कुमार मण्डोरा                   – ब्यावर

4          घनश्याम साकरिया                   – राणावास

5          हंसराज कश्यप                           – गांधीधाम

6          अशोककुमार सोनी                     – फलौदी

7          अमरचन्द काला                         – मेडता

8           श्रीमती नारायणी देवी                 – जालौर

9           महेन्द्र विक्रम सोनी                    — डीडवाना

10         जोरावर मलजी कट्टा                – मेडता

11          मानचन्दजी काला                     – जोधपुर

12          श्रीमती मनोरमा देवी डुंगरवाल – जयपुर

13          कालूरामजी बाडमेरा                  – पोकरण

14          कनैयालाल मथुरिया                 – बीकानेर

15          राणूलालजी सोनी                      – बाडमेर

16          आसानन्द मण्डोरा                    – कानपुर

17          राजेशकुमार बाडमेरा                 – गंगा शहर – बीकानेर

अखिल भारतीय श्री ब्राह्मण स्वर्णकार महासभा

स्थापना काल से अब तक

अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण सुवर्णकार महासभा (वर्तमान में अखिल भारतीय श्री ब्राह्मण स्वर्णकार महासभा) की स्थापना हेतु 28 मई सन् 1908 अक्षय ,तृतीया को जोधपुर के श्री प्रतापचन्दजी वकिल एवं

पाली के श्री नारायणदासजी बैरिस्टर (बाड़मेरा) के सदप्रयत्नों से समस्त भारत में संगठन हेतु एक अपील जारी की गई। वर्षों तक वे समाज के संगठन हेतु प्रयत्न करते रहे। सन् 1908 से पूर्व कोई प्रयत्न हुआ या नहीं यह संशोधन का विषय है।

सन 1923 में सर्वप्रथम सम्मेलन -उनका प्रयत्न फल लाया। काफी लम्बे अन्तराल के पश्चात सन 1923 में सर्वप्रथम सम्मेलन ब्रजभूमि हाथरस (उ.प्र) मे, हाथरस निवासी श्री मुरलीधरजी साकरिया के सभापतित्व में सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। उस समय सम्मेलन में समाज सुधार हेतु जो प्रस्ताव पारित किये गए वे आज भी सामयिक हैं। इस सम्मेलन का असर यह हुआ कि देश में कुछ जगह स्कूल खुले।

द्वितीय सम्मेलन ब्यावर –ब्यावर में जोधपुर निवासी श्रीमान जौहरी हरिरामजी बाड़मेरा के सभापतित्व में 3 नवंबर सन् 1924 को अभूतपूर्व ढंग से संपन्न हुआ। बीकानेर व ब्यावर के नवयुवक मण्डल के कार्यकर्ताओंने अधिक मेहनत की थी। श्री नन्दलालजी स्वागताध्यक्ष थे। श्री नारायणदासजी बैरिस्टर व श्री रामनाथजी जसमतिया ने सम्मेलन अध्यक्ष श्री जौहरी हरिरामजी का माल्यापर्ण कर स्वागत किया। फूलों से सजी जीप में उनका शानदार जुलूस निकाला गया व बन्दूक फोडकर सलामी भी दी गई।

चार दिनों तक चले सम्मेलन में महासभा के अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया संपन्न की गई। स्वागताध्यक्ष श्री नन्दलालजी ने अध्यक्ष पद हेतु जौहरी श्री हरिरामजी का प्रस्ताव रखा, जिसे श्री बद्रीप्रसादजी साकरिया ने समर्थन दिया। सर्व सम्मति से श्री जौहरी अध्यक्ष चूने गये। कार्यकारीणी में कुल 67 सभासदों का समावेश किया गया। पूरे देश से कुल 204 प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दी थी। इसी समेलन में श्री बदरीप्रसादजी साकरिया को उनकी विद्वता को देखकर पंडित की उपाधी से विभूषित किया गया।

तृतिय संमेलन जोधपुर – जोधपुर में दि. 24/10/1925 को अजमेर निवासी वैद्य पंडित कल्याणमलजी शर्मा के सभापतित्व में तृतिय सम्मेलन संपन्न हुआ। जोधपुर में इस सम्मेलन की व्यवस्था का जिम्मा पं. बद्रीप्रसादजी साकरिया ने कुशलतापूर्वक निभाया था। सम्मेलन की रिपोर्ट पढने से ज्ञात होता है कि सभा स्थळ को बिजली की रौशनी से सजाया गया था। जोधपुर के नवयुवकों ने इस सम्मेलन को सफल बनाने के लिए बहुत मेहनत की थी।

चतुर्थ सम्मेलन बीकानेर – श्री अमोलकचन्दजी जसमतिया (आर्य) जिन्होंने हाथरस व ब्यावर सम्मेलनों में उत्साहपूर्वक भाग लिया था, ने बीकानेर में महासभा के सम्मेलन हेतु समस्त समाज को निमंत्रण दिया और आपके सद्प्रयत्नों से श्री नारायणदासजी बैरिस्टर के कुशल सभापतित्व में सन् 1926 में बीकानेर में चतुर्थ सम्मेलन संपन्न हुआ। सम्मेलन में समाज सुधार, प्रौढ शिक्षा और नारी जागरण पर बल दिया गया।

इसके पश्चात महासभा में शनैः शनैः शिथिलता आने लगी। द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात देश में स्वातंत्र्य संग्राम हेतु जगह जगह आंदोलन होने लगे। वातावरण सामाजिक सम्मेलनों के अनुकुल कम व राष्ट्रीय आन्दोलनों का ज्यादा था। फल स्वरुप आजादी के बाद कई वर्षों के पश्चात पुनः चेतना का संचार हुआ।

पंचम महा सम्मेलन जोधपुर – जोधपुर समाज ने फरवरी सन् 1971 में प्रतिनिधि सभा व महासम्मेलन करना तय किया। यह सम्मेलन काफी शानदार रहा। श्रीमान हेमराजजी बाडमेरा (निवृतजज) संपादक स्वर्णप्रभा इस सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रुप में चूने गये। दूर दूर देश के कोने से प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। 11-12-13 फरवरी सन 1971 तीन दिनों तक चला यह सम्मेलन जोधपुर के नवनिर्मित न्याति नोहरे में संपन्न हुआ। जिसमें श्री अमृतलालजी जसमतिया के नेतृत्व में जोधपुर के नवयुवक मण्डल के सदस्यों का प्रशंसनीय योगदान रहा।

छठा सम्मेलन जोधपुर – सन् 1971 के पश्चात सभा फिर ठप्प पड गई और जोधपुर समाज ने पुनः 16-17-18 सितम्बर  1985 को प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन किया। इसका नेतृत्व श्री अमृतलालजी जसमतिया ने लिया। त्रिदिवसीय इस सम्मेलन में समाज के इतिहास के प्रकाशन, स्वर्णप्रभा पत्रिका के पुनः प्रकाशन, महासभा का चुनाव, एवं, हरिद्वार में धर्मशाला क्रय करने हेतु विचार विमर्श किया गया।

इस सम्मेलन में महासभा के अध्यक्ष के रुप में श्री मधुशेखरजी महेचा सर्वसम्मति से चूने गये। महामंत्री के रुप में श्री तुलसी रामजी बूचा जोधपुर ने कमान सम्हाली।

सप्तम सम्मेलन जयपुर – दि. 5/6/7 जनवरी 1986 में जयपुर में श्री सीतारामजी  मथुरिया, श्री नवनीतजी महेचा, श्री गोपाललालजी डुंगरवाल आदि समान बन्धुओं के सहयोग व महासभा अध्यक्ष श्री मधुशेखरजी मेहचा के नेतृत्व में यह सम्मेलन यादगार बना रहा। इस सम्मेलन में दूर दूर से पधार कर समाज बन्धुओं ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। यहीं पर समस्त देश में एक ही युनिफोर्म में समाज का नाम श्री ब्राह्मण स्वर्णकार लिखने तथा मृत्युभोज व विधवा पुनर्विवाह जैसे कई क्रांतिकारी  प्रस्ताव पारित किये गये। श्री ब्राह्मण स्वर्णकार सर्वहितकारी ट्रस्ट की योजना पर भी विचार हुआ।

अष्ठम सम्मेलन बीकानेर – 13-14-15 सितम्बर 1986 को श्री जेठमलजी मण्डोरा (मास्टर साहब) स्वागताध्यक्ष की अगुवाई में जेलरोड स्थित प्रभुकुंज में यह सम्मेलन संपन्न हुआ। पास ही पंचायती कोटडी की जगह में सार्वजनिक सभा भी हुई। इसी सम्मेलन में श्री अखिल भारतीय ब्राह्मण स्वर्णकार सर्वहितकारी ट्रस्ट, जो 3 सितम्बर 1986 को जयपुर के पांच महानुभावों द्वारा स्थापित किया जाकर पंजीकृत करवा दिया ,गया था की विधिवत घोषणा की गई। श्री हेमराजजी बाडमेरा व श्री बद्रीप्रसादजी साकरिया को समाज रत्न की  उपाधि से विभूषित किया गया।

नवम सम्मेलन अहमदाबाद – अहमदाबाद में 28-29-30 मार्च 1987 को अहमदाबाद निवासी श्री लल्लूभाई चौक्सी व श्री भवानी शंकर जी कट्टा की अगुवाई में पंजाबी होल नवरंगपुरा में आयोजित किया गया। यह सम्मेलन अनेक तरह से यादगार व ऐतिहासिक था। समम्मेलन में महिला मण्ड़ल का गठन किया गया। सम्मेलन के अंतिम दिन गुर्जर प्रदेश श्री ब्राह्मण स्वर्णकार सभा का प्रान्तीय सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें श्री डॉ. भुपतिरामजी साकरिया गुजरात प्रांतीय सभा के अध्यक्ष निर्वाचित किये गए। महासभा के अध्यक्ष श्री मधुशेखरजी महेचा तथा श्री अमृत लालजी जसमतिया महामंत्री निर्वाचित हुए।

दशम सम्मेलन इन्दौर – 16/17/18सितंबर 1988 में इन्दौर में उत्साहपूर्ण माहौल में प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन किया गया। श्री सोहनलालजी मण्डोरा राजगढवालों के नेतृत्व में इन्दौर समाज व नवयुवक मण्डल ने इस सम्मेलन को सफल बनाने में अहम भूमिका अदा की। महासभा व ट्रस्ट के चुनाव हुए। मधुशेखरजी पुनः अध्यक्ष व श्री अमृतलालजी जसमतिया महामंत्री निर्वाचित हुए।

अग्यारहवाँ सम्मेलन अहमदाबाद – 28/29 सितंबर 1991 में श्री लल्लूभाई चौक्सी की अगुवाई में अहमदाबाद के गिरधरनगर क्षेत्र स्थित श्री ब्राह्मणस्वर्णकार चैरिटेबल ट्रस्ट संचालित श्री कस्तुरजी वक्ताजी भवन में प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन हुआ। अध्यक्ष श्री मधुशेखरजी मेहचा ने अपने पद से त्यागपत्र देने की इच्छा व्यक्त की, किन्तु उसे स्वीकार नहीं किया गया व आगामी सम्मेलन उदयपुर में रखना तय हुआ। महासभा के खर्च हेतु एक स्थायी कोष का निर्माण किया गया।

बारहवाँ सम्मेलन उदयपुर –उदयपुर में 7/8/9 मार्च 1992 में श्री शेषमलजी जालोरा एवं श्री कुन्दनसिंह दिया के नेतृत्व में आयोजित बारहवें सम्मेलन में महासभा के चुनाव सम्पन हुए। श्री गोपालालजी डुंगरवाल अध्यक्ष व श्री अमृतलालजी जसमतिया महामंत्री चूने गये।

तेरहवाँ सम्मेलन श्री निम्बेश्वर महादेव – फालना - 15/16/17 अक्टूबर सन् 1994 में पाली जिले के फालना के पास प्रसिध्ध तीर्थस्थान निम्बेश्वर महादेव मंदिर परिसर में श्री ब्राह्मण स्वर्णकार धर्मशाला में संपन्न हुआ। यहाँ पर राजस्थान के कोने कोने से पधारे प्रतिनिधियों विशेषकर गोडवाड क्षेत्र के समाजबन्धुओं ने बडी संख्या में उत्साह पूर्वक भाग लिया। श्री गोरधनलालजी बाडमेरा जयपुर वालों ने इस सम्मेलन हेतु काफी मेहनत की।

चौदहवाँ सम्मेलन जोधपुर – 12-13-14 अगस्त 1995 में पुनः जोधपुर में प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसबार जोधपुर समाज में उत्साह की कुछ कमी महसूस की गई। किन्तु प्रतिनिधि सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। श्री गोपाललालजी डुंगरवाल पुनःअध्यक्ष व श्री रवीन्द्रजी मण्डोरा जयपुर महामंत्री निर्वाचित हुए। श्री भवानीशंकरजी कट्टा को “समाजरत्न” से विभुषित किया गया।

पंद्रहवाँ सम्मेलन अहमदाबाद – 7/8/9 अप्रैल सन 2000 में अहमदाबाद के श्री बीकानेर ब्राह्मण स्वर्णकार समाज के तत्कालिन अध्यक्ष श्री बल्लभजी कट्टा व जज साहब श्री भवानी शंकरजी कट्टा एवं श्री शंकरलालजी झारोलिया व अन्य सभी सहयोग कर्ताओं के द्वारा यहाँ आयोजित त्रिदिवसीय प्रतिनिधि सम्मेलन में महासभा व ट्रस्ट के चूनाव संपन्न हुए। श्री काशीरामजी भजूड अध्यक्ष व श्री कुन्दन सिंहजी दिया महामंत्री के रुप में निर्वाचित हुए। ट्रस्ट अध्यक्ष के रुप में श्री शंकरलालजी झारोलिया व महामंत्री के रुप में श्री जयप्रकाशजी जे. हेडाऊ को मनोनित किया गया। इस सम्मेलन की प्रचार व्यवस्था में श्री गोरधनजी बाडमेरा का अहम योगदान रहा।

सोलहवाँ सम्मेलन जोधपुर – लम्बे अंतराल व कई बार किये गये प्रयत्नों के फलस्वरुप 24-25 अक्टूबर सन् 2009 में जोधपुर समाज द्वारा 16 वें प्रतिनिधि सम्मेलन  का आयोजन स्थानीय अध्यक्ष श्री संपतराजजी हेडाऊ और श्री श्यामकमलजी शर्मा के नेतृत्व में उत्साहपूर्ण माहौल में सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। महासभा के चूनाव व ट्रस्ट का मनोनयन संपन्न हुआ। नई कार्य कारिणी का गठन हुआ। श्री भँवरलालजी स्वर्णकार अध्यक्ष व श्री गोविन्दप्रकाशजी भजूड महामंत्री निर्वाचित हुए। सर्वहितकारी ट्रस्ट हेतु साधारण सदस्यों का मनोनयन संपन्न हुआ। जिसके तहत 28 मार्च 2010 को अहमदाबाद में ट्रस्ट संचालक मंडल का गठन किया गया।

यह महासभा का संक्षिप्त इतिहास है। इसमें अनेकों त्रुटि भी हो सकती है। प्रबुद्ध पाठक अगर इस बारे में कोई  जानकारी भेजेंगे तो उनके सौजन्य से प्रकाशित की जायेगी।

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