A A

ब्राह्मण स्वर्णकार

Thu, Aug 5, 2010

History

Chamunda Mataji Temple Keradu Made by Dharmasiji

Chamunda Mataji Temple Keradu Made by Dharmasiji

श्री ब्राह्मण स्वर्णकार जाति मूल रुप से ब्राह्मण है और स्वर्णकारी कार्य करने से स्वर्णकार कहलाई। अन्य कई जातियाँ भी स्वर्णकारी व्यवसाय करती थीं। किन्तु ब्राह्मणों द्वारा स्वर्णकारी  व्यवसाय शुरू  किये जाने से; जाति व व्यवसाय को जोड कर एक पृथक पहचान के तहत वह जाति ब्राह्मण स्वर्णकार के रुप में जानी जाने लगी।

इस जाति के विषय में कहा जाता है कि राजस्थान के जालौर जिले के श्रीमाल, वर्तमान में भीनमाल नगर में इसकी उत्पति हुई।

प्राचीन समय में भीनमाल, श्रीमालनगर के नाम से सुख्यात था। यह नगर उस समय काफी समृद्धिशाली व व्यापार का केन्द्र था। प्रसिध्ध चीनी यात्री ह्यु-एन-सांग ने इ.स. 641 में इस शहर की मुलाकात ली और इस नगर की समृद्धि का वर्णन किया है।

Keradus Shiv Temple

Keradus Shiv Temple

इसी श्रीमाल नगर में हजारों की संख्या में श्रीमाली ब्राह्मणों का निवास था। इन्हीं श्रीमाली ब्राह्नणों में से कुछ लोगों ने स्वर्ण व्यवसाय अपनाया और धीरे धीरे वे श्रीमाली सोनी के नाम से जाने जाने लगे।

कालक्रम से कुदरती आफत, अकाल, आदि कई कारणों से धीरे धीरे लोगों ने अन्य जगह पलायन करना शुरु किया । श्रीमाली सोनी रोजगार की तलाश में पाटण होकर गुजरात सौराष्ट्र की और बढ़े। जो गुजरात में आज श्रीमाली सोनी के नाम से विख्यात है।

श्रीमालनगर से कई श्रीमाली सोनी परिवार मारवाड की और प्रस्थान किये। वहाँ उन्हें बामणिया सुनार या ब्राह्मण स्वर्णकार के नाम से पहचान मिली। यह काल इसा की छठी शताब्दि तक का है। इसका उल्लेख श्रीमाली सोनीनो इतिहास पुस्तक में लेखक  श्री जमनादास नकाभाई जडिया ने किया है।

इस जाति के बारे में पंडित श्री नाथूलालजी शर्मा (डुंगरवाल) ने अपनी पुस्तक ब्राह्मण स्वर्णकार (प्रकाशन वर्ष भाद्रपद संवत 2045 ) के उपसंहार पृष्ठ 65 पर लिखा है कि  “बामणिया सुनार जाति ब्राह्मण वर्ण में है। यह जाति श्रीमाल नगर में, जो वर्तमान में भीनमाल कहलाता है, निवास करने वाले ब्राह्मणों से करीब 1500-2000 वर्ष पूर्व बनी है। कारण में वे लिखते हैं कि” जब जैन और बौद्ध धर्म के प्रचार के कारण वैदिक धर्म लुप्त प्रायः सा हो गया था, लोगों की आस्था कर्मकांड में नहीं रही थी। फल स्वरुप ब्राह्मणों की पूछ न होने से उनकी रोजी रोटी का प्रश्न पैदा हो गया था, तब कुछ ब्राह्मणों ने गहना घडने का काम सीखा। कट्टर ब्राह्मणों ने इस सुनारी काम करने वालों को अपने से अलग कर दिया और, इन्होंने अपनी एक अलग ही जाति बना ली, जो बामणिये सुनार नाम से कहलाने लगी। धीरेधीरे यह लोग श्रीमाल से अन्य नगरों व गाँवों में जा बसे। संवत 759 में श्री धर्मसीजी ने इस जाति के लोगों को एकत्रित कर इनके रीति रिवाज निर्धारित किये और गाँव नगर शासन आदि के आधार पर इनकी 84 खाँपें कायम की। तभी से यह खाँपे आज दिन(तक) वैसी ही चली आ रही है।

Temples of Keradu

Temples of Keradu

श्री ब्राह्मण स्वर्णकार’- पुस्तक के लेखक श्री बाबूलाल शर्मा (सेवा निवृत आई पी एस – श्रीमाली ब्राह्मण) पेज 64 पर श्रीमाल पुराण का उलेख करते हुए लिखते हैं कि श्रीमाल पुराण/महात्म्य यह प्रमाणित करता है कि बामणिया सुनारों (ब्राह्मण स्वर्णकार) की उत्पत्ति श्रीमाली ब्राह्मणों से श्रीमाल नगर में हुई जहाँ उन्होंने स्वर्ण अलंकार निर्माण का कार्य प्रारंभ किया व वहाँ से भारत के अन्य कोनों में बसे। जिसकी पुष्टि धर्मसीजी के द्वारा समाज सुव्यवस्था हेतु निर्मित 84 अल्ल (खाँपों) के संबंध में लिखे विवरण से ज्ञात होता है। उसमें सर्व प्रथम लिखा है कि यह कौम सिरमाली (श्रीमाली) है। इस प्रकार उन्होंने सिरमाली (श्रीमाली) सुनारों के 84 अल्ल स्थापित किए। ये व्यवस्था उनकी  वंशावली को देखते हुए संवत 700 व 800 के बीच के संवत में स्थापित की प्रमाणित होती है।

वहीं हमारे समाज के मूर्धन्य साहित्यकार व इतिहासकार स्व. आचार्य  पंडित बदरीप्रसादजी साकरिया द्वारा समाज के इतिहास के विषय में जो शोधकार्य किया गया, उसे पुस्तकाकार दिया उनके सुपुत्र प्रोफेसर डॉ. भुपतिरामजी साकरिया ने। उन्होंने समस्त शोधकार्य को तपोनिष्ठ ब्राह्मणों का इतिहास के नाम से प्रस्तुत पुस्तक में उर्द्युत किया है।

इस पुस्तक में तपोनिष्ठ पुराण के सात अध्यायों का वर्णन है। डॉ. भूपतिरामजी साकरिया के अनुसार हम तपोनिष्ठ ब्राह्मण हैं, और तपोनिष्ठ पुराण के अध्याय में पुष्करारण्य क्षेत्र पुष्कर का महात्म्य व तपोनिष्ठ ब्राह्मणों की आबू में उत्पत्ति और सप्तम अध्याय में तपोनिष्ठ ब्राह्मणों को भगवान विष्णु व भगवती लक्ष्मीजी के दर्शन तथा स्वर्णाभूषणों के निर्माण का उनके अहैतुक व अनमांगे विचित्र वरदान का वर्णन है।

डॉ. साकरियाजी ने पुस्तक के पृष्ठ13 पर प्रस्तावना में लिखा है कि अर्बुदाचल (आबूक्षेत्र) स्थित देवाजिर का वर्णन करना यहाँ संगत ही होगा, क्यों कि वही हमारा उत्पत्ति स्थान है। रमणीय पर दुर्गम घाटी में स्थित देवाजिर सनसेट पोइन्ट से दो मील नीचे उत्तर में है । वहाँ के विस्तृत क्षेत्र में फैले मन्दिरों और आश्रमों के भग्नावशेष इस बात के साक्षी हैं कि अपने काल में इस तपोभूमि का देश में बडा महत्व रहा होगा। उन खण्डहरों में प्राप्त भगवान शिव की विशाल त्रिमूर्ति आज अनादरा गाँव की शोभा बढा रही है। आज देवाजिर में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में एक चतुर्भूज विष्णु का मन्दिर अवस्थित है। काले पत्थर से निर्मित यह मूर्ति थोडी खण्डित, पर भव्य है। संवत 1684 में इस मंदिर के पुनरुध्धार का वहाँ एक शिलालेख है, जो मंदिर के द्वार पर दिवार में जडित है। समाज को चाहिये कि शीघ्रताशीघ्र इस मन्दिर की मरम्मत आदि करवा तथा पूजादि की व्यवस्था कर इस गौरवमय जाति स्थल पर प्रति अक्षय तृतिया के शुभदिन तीर्थ यात्रा की जाय।

ब्राह्मणों के अलावा अन्य जातियों में गोत्र नहीं होते,

नूखें या अटकें ही होती हैं।जब कि ब्राह्मण स्वर्णकारों

के गोत्र यह प्रमाणित करते हैं कि वे अमुक ऋषि के

वंशज हैं और  नुखें यह घोषित करती हैं कि अमुक

स्थान, अमुक राजवंश  गुरू या पुरोहित से सम्बद्धता

है। याने गोत्र वंश का सूचक है और नुख विशेष 

पहचान की। अतः ब्राह्णण स्वर्णकार जाति मिश्रित

जाति नहीं है। (बल्कि शुध्धब्राह्मण जाति है।)

===== डॉ. रामनरेश लक्ष्मीनारायण काला

बीकानेर से सन 1986 में प्रकाशित  – स्वर्णलेखा –

ब्राह्नण स्वर्णकार जाति की उत्पत्ति और विकास –

कुछ बिखरे सूत्र पेज नं. 71-77 से साभार

इस प्रकार हम उपरोक्त सभी विद्वानों की राय देखें तो यह निर्विवाद सत्य है कि ब्राह्मण स्वर्णकार जाति ब्राह्मण वर्ण से उत्पन्न हुई है, जिसका प्रतिपादन श्रीमाली सोनी विद्वान श्री जमनादास जडिया, मूर्धन्य इतिहासकार व साहित्यकार श्री बद्रीप्रसादजी साकरिया ने भी किया है। पंडित श्री नाथूलाल शर्मा व श्री बाबूलाल शर्मा भी इसके पक्षधर हैं। अतः यह जाति ब्राह्मण वर्ण से अस्तित्व में आई है। इतिहासकारों की दृष्टि में भी यह ब्राह्मण वर्ण की जाति है। प्रसिध्ध विदेशी इतिहासकार कर्नल टोड ने भी बडे परिश्रम से राजस्थान के इतिहास का निर्माण किया है। व 1813 ईस्वी सन में जालौर की विभिन्न जातियों की गणना की थी जिसमें ब्राह्मणिया सुनारों को विभिन्न जातियों के अंतर्गत ही माना है।

==========================
Video of Temple in Keradu
==========================

इतिहासकार पं. छोटेलाल शर्मा लिखित जाति अन्वेषण और ब्राह्मण निर्णय में भी हमें ब्राह्मण माना गया है। मारवाड राज्य की मुर्दमशुमारी रिपोर्ट सन् 1891 में भी इसका उल्लेख है। जोशी बालकृष्ण अवतारी, जो मारवाड स्टेट के इतिहास विभाग में क्लर्क थे, ने दि. 8/7/1925 में जातियों की तहकिकात – सुनार बामणियों की में भी इस जाति को संपूर्ण तया ब्राह्मण वर्ण का होना प्रतिपादित किया है।

Tags: ,

:like>

71 Responses to “ब्राह्मण स्वर्णकार”

  1. Bhaumik s soni says:

    Sriman Sampadak Mahoday Sunderlalji Sadar Namaskar, Brahman Swarnkar Nam ki yeh website chhalu karke Aapne bahut hi Achha karya kiya hai. website ke jariye duniyabhar me base hamare samajbandhuon ko samaj se judi har jankari uplabdh karwane ka yeh prayas kafi prasansniya hai, Brahman Swarnkaro ka Itihas, Trust, Mahasabha, Swarnjagriti Patrika, Dharmsiji ka Itihas & Bawdi ki Jankari hamare samaj ke liye bahut hi upyogi sabit hogi.

    • admin says:

      Thank you Bhaumikbhai,

      If you can provide more information about our society please let us know, we wish to develop online electonic encyclopedia of brahmin swarnkar, We also wish to scan old books lituratures of our society and make it available in pdf format for our members for all coming generation,

      Regards,

      Sunderlal soni

  2. MAHENDRAKUMAR SONI (HEADOW) says:

    Dear Sir,

    Now we can know about our history

    very good work and very good details about our community.

    all the things regarding our past(history) and by this time

    it is necessary to be online . and you had prove it.

    Regards,
    MAHENDRAKUMAR SONI (HEADOW)
    VINAYAK MARKTING
    SANTACRUZ MUMBAI

  3. Hemant Kumar Soni says:

    A very nice description of our history

    ————————————–
    First of all my heartiest congratulations to you for creating this website. I am searching for such a website for a long time. And when I could not find, I was planning to start the same. But My search ended today when I came across this. From now onwards, I shall try to stay in constant touch with you.

    I shall be glad to be a part of the initiative.

    Again Lots of wishes and heartiest congratulations!!!

    From:-
    Hemant Kumar Soni
    B. E. (Hons.) in Civil engineering
    BITS Pilani
    Pilani, Jhunjhunu (Rajasthan)-330331
    Hometown – Nagaur(Rajasthan)-341001
    Currently at Central Building Research Institute, Roorkee(Uttarakhand)

  4. mahesh soni says:

    Namaskar,
    Brahmin swrnkar web site par itihas padhkar achchha laga. Is me jo information di gai he us se yuvao ko brahmin swrnkaro ke bare me esi jankri milegi jis se vo anjan he. Main web site nirmatao ko dhanyvad deta hu ki unho ne ye web site shuru karke sarahniy kary kiya he.

  5. First of all my heartiest congratulations to you for creating this website. I am searching for such a website for a long time. And when I could not find, I was planning to start the same. But My search ended today when I came across this. From now onwards, I shall try to stay in constant touch with you.

    I shall be glad to be a part of the initiative.

    Again Lots of wishes and heartiest congratulations!!!

    From:-
    Dharmendra Kumar Soni
    B. A. and Computer Diploma Holder
    Kalyan Pura Marg No. 2,
    Subhash Chock, Opp. Carving Furniture,
    Barmer (Raj)

    • Swarn Jagriti says:

      Thank you very much Mr. Dharmendra kumar, Its our pleasure that you have noticed this website, and being a part of this website, we request you to give your valuable suggestions on it.
      For those who are interested to take part in this website as an author, and wish to write social news, suggestions and social articles, we provide login id and password.
      If interested please let us know about your idea on contact@brahminswarnkar.com

  6. Naresh Soni says:

    I heartily congratulate to Mr.Sunderlalji the idealist personality and his entire team for creating most valuable and Informative site for our caste and those people who wants to know about our community .
    Rare person knows about the history that is given by you in this site .
    Again I congratulate to you. I wish you all the best of success .

    Regards

    NARESH D.SONI

    Ahmedabad

  7. Anup Kumar Soni says:

    Hi frnds me Anup Kumar Soni(Mandawra), 25 Male From Fatehabad (haryana) working as DEO At Excise & Taxation Deptt. Fatehabad since last 5 year. First of all my heartiest congratulations to you for creating this website. I am searching for such a website for a long time. And when I could not find, I was planning to start the same. But My search ended today when I came across this. From now onwards, I shall try to stay in constant touch with you.This is good work to connect that community to the world.
    anupsoni2005@gmail.com
    ANUP SONI
    98962055512

  8. Chandraprakash Soni says:

    Thank you very much for providing us these valuable information and detailed history about our community.

    Regards
    Er. Chandraprakash Soni

  9. vishal chandmal soni says:

    Namaskar,
    mera naam vishal chandmal soni hai main rajgarh (dhar) m.p. se hu.
    Brahmin swrnkar web site par itihas padhkar achchha laga. Isme jo jankari di gai he us se logo ko brahmin swrnkaro ke bare me bahut si jankri milegi jis se vo anjan hai. Main web site nirmatao ko dhanyvad deta hu ki unho ne ye web site shuru karke sarahniy kary kiya he. ek baat aur main mandovara hu aur main chahta hu ki iske bare mein bhi jankari dali jaye taki logo ko aur itihas pata chale

  10. hello sir,
    my self kapil soni.my native place is chadrai(jalore), and actualy i want heartly thanks to you for making such website,and i think i was aware from this history of our society but after providing such a website of us then i get all think about brahmin swarnka samaj,so thank you so much again.

    from:-
    kapil P soni,
    8TH SEMISTER,
    B.E MECHANICAL,
    VISNAGAR,
    DIST. MEHSANA,
    GUJARAT.

  11. sushil soni says:

    katta ki kuldevi ka naam kya hain and kaha hain

  12. Since childhood it was a mystry for me that why do my parents says that we are different from my other soni friends.. What make us different. This question kept my mind bubbling since then and there was a desperate desire to know what we are and what’s the history behind the our origin. I am really glad to know about our history, our origin..

    Thanks a lot for such a nice article. It would be my great pleasure if i can do any kind of help in maintaining this web site..

    • admin says:

      Mr. Virendraji

      Its our pleasure to have such a great comment for website, We honored really. This website is supported by very active and next generation people like u. Along with economical support, this website need valuable suggestions so the website can be very helpful to our society.

  13. haresh kumar soni jadolia says:

    fantastic work nice info of our community gr8 work with dedication i hav no words to say superb
    i need some info regarding jhadolia gotra the name of kuldevi and kuldev which often creates confusion in our goutra

  14. Vipin Bhardwaj (Katta) says:

    Sir, Brahmin Swarankar samaj ki or vistrit detail aj ke samay ke liye bahut jaruri hai. Kyouki jaha hamara samaj bhut chota hai. Waha par log nahi jante hai ki Brahman Swarankar bhi koi hai iske liye bhi kuch na kuch prayas bahut jaruri hai.

  15. NIRMAL says:

    Brahaman samaj ke bare me vistrit jankari dene ke liye dhanyavad. hame ye prayas karna chahiye ki Apne samaj ke bare me ye history harek ko pata ho.Aur sath me shrimali gujarati soni jo Hamare hi samaj se hai lekin woh hamse alag ho gaye the to unko bhi sath lene ka prayas kiya jaye

  16. Paresh Soni says:

    Kindly publish kuldevi’s and their temple locations as per the gotras as their seems to be less awareness and conflicting informations.

    Keep up the good work

    Paresh Soni

  17. Tulsi Das Sharma says:

    Kudos for a detailed website like this. For years I was in a dilemma as how to know the history of the society I belong to. Can you please through some light on the persons belonging to brahman swarankar who migrated to Pakistan and returned to India after partition and settled in different parts of the country. Are they also the part of this samaj or they belong to some other society?

    • admin says:

      Mr. Tulsidas sharma,
      Thank you very much for your kind appraisal for the website construction. We are honored really.
      And yes as per history We all are migrated to various part of india for our survival reasons and pakistan was part of india at that time, so they are also part of Brahmins as well Brahmin swarnkar samaj…

      • Tulsi Das Sharma says:

        Thank you so much for clearing my doubt. Please suggest some links/references you know of such persons who came to india after partition. Secondly I am told by my elders that my kuldevi is Chamunda Devi as I belong to Jasmatiya Gotra. but according to your website the Kuldevi for Jasmatiyas is Mahalaxmi Devi. Please clarify on this point and also where is the Mahalaxmi temple located?
        Best Wishes.

        • admin says:

          Shri Tulsidas Sharma,

          In the case of kuldevi or kuldev according to gotras, there are too much confusion, because books – references[Authors’ idea] speaks differently and traditionally we follow as per our forefather’s tips generation to generation. It is always better to follow tips of our forefather or relatives instead of books [which is Author’s idea]. References are made for those who are beginners, have no sources to know of tradition.

  18. Prof. D.G.SONI says:

    Respected sir,
    Namaskar
    i am very very happy to know about our society and its history.In addition to this online patrika is very wonderful.it is veryvery necessary toupdate ourselves.
    I Want to know about our kuldevi’name (for BUCHA)and its location.Kindly help me
    Thanks

    • admin says:

      Dear Prof. D.G. Soni,
      We are really honored with your appraisal in comment, Thank you very much sir ! We are really sorry that our society do not have universally accepted reference on kuldev or kuldevi with gotra and location in details, we always suggest to ask our elders for this. We have seen difference of opinion in same gotra for kuldev and kuldevi and location.

  19. Mulchand Mandora says:

    jankari ke lie khub khub dhanywad

  20. sawai soni barmera says:

    i already heard this story from my parents but its feel very good when i got this on internet. i appreciate you for this work.
    Basically i belongs to barmer and also used to go keradu if u want any pic of keradu temple,i can provide u…

    Thanks…

    sawai soni
    power engineer(jsw energy)

    • admin says:

      सवाई बाडमेराजी, यह जानकर अत्यंत खुशी हुई कि आप अपने बुजुर्गों द्वारा अपने श्री ब्राह्मण स्वर्णकार समाज के इतिहास को सुनते आ रहे हैं,जिसे आपने इस वैब साईट पर पढ़ा, जिससे आपको रोमांच हुआ. यह स्वाभाविक भी है.हमारा यह छोटा सा प्रयास समाज के आगे अपने समाज की अस्मिता व गौरव को पेश करना है, जिससे आने वाली पीढी अपने समाज पर गर्व महसूस कर सके. आपके पास अपने समाज से सम्बंधित जो भी जानकारी हो कृपया वह हमें भिजवाने की जहेमत लें, ताकि उसका लाभ समस्त समाज को मिले.

      @ संपर्क- 093282 41151
      सोनी सुन्दरलाल प्रहलादजी
      सम्पादक- स्वर्ण जागृति पत्रिका
      283/6, प्रेम दरवाजा के सामने, बाबा का डेहला,
      अहमदाबादः-380 002

  21. Dharmendra R Parmar says:

    Excellent information,

    It was told that ‘Maru Kansara’ in Gujarat/Suarashtra was migrated from Kiradu, Rajasthan.

    Some stories about origin of kansara community refers ‘maha kali katha’.

    I would like to know whether the maru kansara is same as ‘Brahmin swarnkar’?

    • admin says:

      Dear Dharmendra R Parmar,

      First of all,Thank you very much for your kind appreciation ! Maru kansara is derived from Brahmin swarnkars because of their business in the past ….and is absolutely same.

  22. Mukul G.Soni says:

    Respected Sir,
    Hum log Gujarat ke Shrimali Soni (sunar) hai, moolrup se humlog Bhinmal nagar ke Brahmin Swarnkar hai. Mein app ke website se bahut hi prabhavit hua hoon.
    Mujhe Shrimali soni / Brahmin Swarnkar ke bare mein likhi gai vividh pustak purchase karni hai:

    1)Lekhak : Shri Jamnadas Nakabhai Jadia Pustak: Shrimali Soni no Itihaas. (Gujarati mein.)

    2)Lekhak : Pandit Nathulalji Sharma (Dungarwal)
    Pustak : Brahmin Swarnkar

    3)Lekhak : Prof. Dr. Bhupatiramji Sakariya
    Pustak : Taponisth Brahmano kaa Itihaas

    4)Lekhak : Shri. Babulal Sharma
    Pustak : Shri Brahman Swarnkaar.

    Sir,Kripayaa mujhe iss char pustak ke vyaktigat keemat aur kahan par milegee ooskaa address batane kaa kast kare

    Mujhe urgently reply dee, please.
    Dhanyaavaad,
    Mukul G. Soni.
    51-B / 1008, BHAD, Samta Nagar,
    Kandivali – East, Mumbai 400101.
    Telephone No : 022-28868761.
    e mail ID : maha_narmada@yahoo.com
    ——-Sandesh Samaapt———-

    • admin says:

      श्री मुकुलभाई सोनी साहेब, नमस्कार!, मैं आपको कुछ तकनीकी कारणों की वजह से जवाब नहीं दे पाया.
      आपको पुस्तक 1) श्रीमाली सोनी नो इतिहास : आपके समाज में ही प्राप्त हो सकेगी. और अब शायद यह अप्राप्य भी है.
      इसके सिवाय 2) बद्रीप्रसाद साकरिया लिखित पुस्तक ” तपोनिष्ठ ब्राह्मणों का इतिहास” 3) नाथूलाल शर्मा द्वारा लिखित “ब्राह्मण स्वर्णकार”
      तथा 4)श्री बाबूलाल शर्मा द्वारा लिखित ” श्री ब्राह्मण स्वर्णकार ” ये सभी पुस्तकें आपको इसी वैब साईट पर सम्पूर्ण पढने को मिल जायेगी
      तथा आप डाउनलोड विभाग में जाकर प्रिंट आउट ले सकते हैं.

      वैसे ये सभी पुस्तकें अप्राप्य हैं.

  23. kamlesh budhbhatti says:

    Respected Sir

    I am from Kachchh ( Gujarat).

    I wish to undertake a research work on our community’ s history . Would you help me in finding out the authentic sources to follow and persons to meet?

    Can any one throw light on the emergence of the surname Budhbhatti’?

    • admin says:

      कमलेशभाई, क्या आप श्री मारू कंसारा सोनी हैं ? अगर हाँ, तो आप मूल रूप से श्री ब्राह्मण स्वर्णकार हैं. आपका श्री मारू कंसारा सोनी समाज का इतिहास मैं उपलब्ध नहीं करवा सकता, वो आपके समाज से ही आपको प्राप्त हो सकेगा. श्री ब्राह्मण स्वर्णकार समाज का इतिहास आपको इसी वैब साईट पर डाऊनलोड विभाग में उपलब्ध हो जाएगा. सो आप उसकी प्रिंट आउट ले सकते हैं. इतिहास की पुस्तकें फिलहाल अप्राप्य हैं.

      कमलेशभाई बुधभट्टी साहब, वैब साईट की मुलाक़ात के लिये धन्यवाद !!

  24. devendra soni says:

    Resp.sir ,
    I WANT TO KNOW ABOUT OUR KULDEVI’S NAME AND ITS LOCATION FOR BUCHA GOTRA
    THANKS

    • admin says:

      देवेन्द्रजी, आपकी बुचा गोत्र की कुलदेवी “” स्वांग्याय माता “” है, जिनका स्थान जैसलमेर के पास तालाब पर स्थित है. वैसे कुछ लोग आशापुरा माता – नाडौल ,जिला पाली को भी मानते हैं.

  25. Harshad Badmera says:

    Respected Sir,

    I want to know about our our kuladvis original location in kutch (Gujaraat) Badmera Gotra.

    Jay mataji!!

  26. Harshad Badmera says:

    Respected Sir,

    I want to know about our kuladvis original location in kutch (Gujaraat) Badmera Gotra.

    Jay mataji!!

  27. Adarsh says:

    Wanted to know Kuldevi name and locaton for Katta Gotra.

    • admin says:

      कट्टा गोत्र की कुलदेवी माता उष्ट्र वाहिनी ( ऊंट सवार ) देवी मां है.

      • Shailesh says:

        Thanks Admin Ji for letting us know katta gothra’s kuldevi ji.

        Do you have any idea where the temple is located for Usth Vahini Maa. I am planning to visit there for dharshan.

        • admin says:

          शैलेशजी, आप कट्टा गोत्र से हैं, और आपकी कुलदेवी उष्ट्र वाहिनी माता हैं, तथा आपकी गोत्र के आदि पुरुष प. पू. लोहटजी दादोंजी हुए, जो पूर्व काल में शत्रुओं से लोहा लेते हुए शहीद हो गये थे, जिनकी समाधि जैसलमेर के पास लोदरवा में है और उसी समाधि के निकट उष्ट्र वाहिनी माता का मंदिर अवस्थित है. आप चाहें तो लोदरवा जाकर वीर वर प.पू. दादोजी की समाधि के दर्शन के साथ अपनी कुलदेवी के भी दर्शन कर सकते हैं.
          वैसे आप आपके नजदीक कहीं पर भी उष्ट्र वाहिनी माता के मंदिर जाकर उनकी पूजा कर सकते हैं.

  28. Neel says:

    Hello
    I would like to know if “Brahmin Maru Soni” falls under Brahmin Swarnkar ? I would like to know the history of Brahmin Maru samaj but i can not find.

    Regards

  29. lal krishan soni says:

    my self lal krishan soni headow.my native place is jalore city, and actualy i want heartly thanks to you for making such website,and i think i was aware from this history of our society but after providing such a website of us then i get all think about brahmin swarnka samaj,so thank you so much again.ok

  30. lal krishan soni says:

    my self kapil soni.my native place is chadrai(jalore), and actualy i want heartly thanks to you for making such website,and i think i was aware from this history of our society but after providing such a website of us then i get all think about brahmin swarnka samaj,so thank you so much again.

    LAL KRISHAN SONI banking sevice
    KHATRA VAS,MANAK CHOWK
    JALORE
    CONT. NO 9413000564

  31. lal krishan soni says:

    LAL KRISHAN SONI banking sevice
    KHATRA VAS,MANAK CHOWK
    JALORE
    CONT. NO 9413000564

  32. Dr Anand Sharma(kala) says:

    thanks this information is accurate and enlightened in the darkness now with this research completely clear that we brahmin swarnkaar are son of rishi

  33. JITENDRA SONI says:

    NAMSKAR ME BRAHMAN SWARNKAR SONI HU MERA GOTRA ZADOLIYA (JHADOLIYA)HE AUR ME SIROHI ROAD (PINDWADA)ME RAHETA HU.MUJE AUR MERI FAMILY AUR GHAR K SAARE VADILO LO PATA NAHI HE K HAMAARI KULDEVI AUR KULDEVTA KOUN HE.TO KRUPA KAR K AAP HAME BATAAYE KI HAMAARI KULDEVI AUR KULDEVTA KOUN HE.

    • admin says:

      जितेन्द्रजी, आपकी गोत्र झारोलिया है. आपके पिण्डवारा के नजदीक जलेरी माता का मंदिर कुछ ही वर्षों पहले नया बना है, आपकी गोत्र बंधू उसे मानते हैं /
      मंदिर बन्ने से पहले सिरोही रोड पर श्री ब्राह्मणवाडजी के बिलकुल नजदीक आरासना अम्बाजी को मानते हैं. आशा है कि आपके मन का समाधान हो गया होगा.

  34. JITENDRA SONI says:

    PRANAM GHAR ME PUCHNE PAR PATA KISI KO NAHI HE PHIR BHI SAB ALAG ALAG KAHETE HE. KOI JALERI MATA KAHETA HE KOI BRAHMANI MATA KAHETA TO KOI KSHEMKARNI (KHIMAJ MATA) KAHETA HE TO KOI AMBE MATA TO KOI CHAMUNDA MATA BOLTA HE KISI KO SAHI KYA HE VO PATA NAHI HE TO AAP SHRI KI BADI MAHERBANI HOGI K HAME BATAYE KI HAMARI KULDEVI KON HE. AAP KE UTTAR KI PRATIKSHA ME…. JITENDRA SONI PINDWADA RAJSTHAN

  35. Navin Soni says:

    ब्राह्मण स्वर्णकार समाज कॆ इतिहास कॊ आपनॆ बहुत बारीकी सॆ विश्लॆषण करकॆ तथ्यॊं और उदाहरणॊं द्वारा कॊ समक्ष प्रस्तुत किया। जिससॆ सभी अपनॆ इतिहास सॆ परिचय करानॆ कॆ लिए आपकॆ द्वारा किया गया प्रयास सराहनीय और प्रशंसनीय है।
    धन्यवाद!
    नवीन सॊनी बड़नगर
    जिला:-उज्जैन (म़प्ऱ)

  36. Navin Soni says:

    ब्राह्मण स्वर्णकार समाज कॆ इतिहास कॊ आपनॆ बहुत बारीकी सॆ विश्लॆषण करकॆ तथ्यॊं और उदाहरणॊं द्वारा समाज की वॆबसाईट बनाकर समाज हॆतु प्रस्तुत किया। निश्चित ही आपकॆ द्वारा किया गया कार्य सराहनीय और प्रशंसनीय है जिससॆ सभी समाजजन अपनॆ इतिहास सॆ परिचित हॊकर लाभान्वित हॊंगॆ।

    धन्यवाद!
    नवीन सॊनी बड़नगर
    जिला:-उज्जैन (म़प्ऱ)

  37. Keshav Kumar says:

    “मुरटासीण माता” का इतिहास , मांडण(मांडल) गौत्र , की जानकारी हमारे e-mail पर भेजने का कष्ट करे |
    धन्यवाद

    केशव सोनी
    shrutkirti786@gmail.com
    Whatsapp no. 7206970905

    • admin says:

      श्री केशवकुमार साहेब, यह वैब साईट श्री ब्राह्मण स्वर्णकार समाज की है, और उसमें “मुरटासीण माता” का कहीं उल्लेख नहीं मिल रहा है.
      इसके लिए आप अपने समाज के बुझुर्गों व परिवार जनों से या बही बंचा भाट से संपर्क करें.

  38. Rahul soni says:

    महोदय प्रणाम
    “दिया ” गोत्र की कुल देवी कहाँ पर
    स्थित हैं ।

    Rahul soni
    Mbbs

    • admin says:

      राहुल सोनी साहब , आपकी दिया गोत्र की कुलदेवी के बारे में मैं जानकारी जुटा कर आपको बताउंगा.

  39. Jitendra soni says:

    Namaskar admin ji muje pata he ki pichle thode varso se Jaleri mata k mandir me mela karte he aur aarasuri ambaji bhi he lekin ye confusion ki vajah se aapko pucha tha ki sahi me kon Kuldevi he lekin aapne bhi confuse hone vala javab diya.

    • admin says:

      जितेंद्रजी सर, इससे ज्यादा जानकारी आपके परिवार के बुझुर्ग या भाट बता सकते हैं.

  40. Ashok Chandra Dubey 'Ashok' says:

    Sir.
    I live in BHOPAL(M.P.). I am Editor, Printer and Publisher of a monthly magazine for Brahmin samaj, their glorious ancient history & culture. I want to publish articles on Brahmin swarnkars.
    Interested persons may please contact on mobile N0 096171 29889 or mail to – vipravani22@gmail.com.
    Thanks
    Regards
    Ashok Chandra Dubey ‘Ashok’
    Chief Editor
    VIPRA VANI

    • admin says:

      धन्यवाद अशोक दुबे सर ! मैं आपसे जरुर संपर्क करूँगा.

  41. Gopal soni says:

    Jasmatiya brahaman parivar ki kuldevi aur bhairuji kaha par hai aur unka name kya hai our kon se stat me hai

Leave a Reply

Ahmedabad Ajmer Barmer beawar Bhinmal Bikaner gandhinagar General Himmatnagar Jalore Jobat jodhpur Keradu kumbhalgarh merta Mumbai Nagaur News Paper pali Phalodi Sheoganj sirohi swarn jagriti अजमेर अहमदाबाद जालौर जूना केराडू जोधपुर जोबट कुंभलगढ़ गांधीनगर नागौर पाली बाडमेर बीकानेर ब्यावर भीनमाल मुम्बई मेड़ता शिवगंज समाचार पत्रिका सर्वसामान्य सिरोही स्वर्ण-जागृति हिम्मतनगर

Find

© 2015 Brahmin Swarnkar. Powered by Next On Web