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110 years ago………… A great man ……………….. श्री नारायणदासजी बैरिस्टर

Sat, Sep 18, 2010

Social Leaders

110 years ago……….. A great man… Barrister Shree Narayandasji..

आज से ११० वर्ष पूर्व जब सारा देश शिक्षा में पिछडा हुआ था तो मारवाड राज्य का तो कहना ही क्या ?

और उसमे भी हमारे समाज की अवदशा का वर्णन भी नहीं हो सकता । ऍसी विपरीत परिस्थितियों में समाजके एक नव युवक का विलायत से बेरिस्टरी पास करके लौटना हैरत अंगेज ही माना जायेगा !

आपके पिताजी का नाम श्री चौथमलजी था ।  तीन भाइयों में [श्री जगन्नाथजी और बदरीदासजी दोनो बडे] सबसे छोटे श्री नारायणदासजी अपनी प्रतिभा के बल पर तथा अग्रज बदरीदासजी व जोधपुर के रिजेण्ट सर प्रताप के घनिष्ठ सबंधो के कारण बेरिस्टर बन सके । विलायत से लौटते समय वे युरोप के अनेक देशो और अमेरिका, कनाडा, जापान आदि प्रगतिशील मुल्कों की यात्रा कर आयें ।

जोधपुर लौटने पर उनकी इच्छानुसार सर प्रतापने उनको पाली का हकिम बनाया [Sir Pratap Singh (1845-1922) was the Maharaja of Idar between 1902 and 1911. He also served at various times as regent and chief Minister of the princely state of Jodhpur. He was  also an accomplished soldier and sportsman.]।

नारायणदासजी समाज के पहेले हाकिम थे । हाकिमी करते समय प्रशासकीय कार्य तो आपने अति कुशलता से किये, जिससे उनकी सर्वत्र प्रशंसा हुई । परन्तु इसके साथ साथ समाज हित आपने कभी ओझल नही होने दिया । परिणामस्वरुप वर्चस्व वाले धनाढ्य वर्ग से उनकी न बनी और उन्हे हाकिमी छोडनी पडी ।

Sir Pratap -Idar

Sir Pratap King of Idar

सर प्रताप  उनकी कार्य कुशलता के कायल थे । अतएव उनको अपने राज्य ईडर ले गये, जहॉ सात वर्ष तक वे सेशन व डिस्ट्रिक्ट जज रहे । गौर वर्ण तथा प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी बैरिस्टर साहब बहुत ईमानदार, निर्भिक व स्पष्टवक्ता थे । जीवन में भाग्य जैसी भी कोई वस्तु होगी,  नहीं तो इन गुणोंसे युक्त पुरुष किसी हाईकोर्ट के चीफ जज बनते ।

वे अपने वचन के पक्के व मातृभक्त थे । किसी से यह बात सुनकर कि लंदन में मांसादि खाना पडता है, उनकी माताने मना कर दिया। श्री नारायणदासजीने तब प्रतिज्ञा की कि वे इनका स्पर्श तक न करेंगे, तब कहीं मातासे आज्ञा मिली । जब यह समाचार सर प्रताप को मिले तो वे प्रसन्न हुये पर लंदन में शरीर गरम रखने की आवश्यकता को समझ उन्हें खानेके लिये कस्तुरी की गोलियां साथ में दीं ।

श्री नारयणदासजी और उनके सहयोगी पं. बदरीप्रसादजी साकरिया में प्रगाढ मित्रता थी और इन दोनों के अथक प्रयत्नो के फल स्वरुप महासभा की नींव रखी गई । ब्यावर महासभा में आपने चार व्याख्यान दिये तथा उनकी सभा संचालन की पटुता ने उपस्थित समुदाय पर भारी प्रभाव छोडा । बीकानेर के चौथी महासभा के आप अध्यक्ष बनाये गये थे।

आप ही के प्रयत्नों के फल स्वरुप स्वर्णकारों पर जो “ख्ररडा” टेक्स लगाया जाता था, वह बन्द करवाया गया । दो तीन सदियों से चले आ रहे घोडे के झगडे से उत्पन्न विकट परिस्थितियों को दुर करने का आपने जोरदार प्रयत्न किया । तत्सम्बन्धी केसों की कोर्ट में पैरवी की । समाज सुधार व संगठन के लिये आपने श्री प्रतापचंदजी वकील [जेसोल] के साथ एक अपील सन १९०८ में प्रसारित की थी । आपकी समाज के प्रति अनन्य निष्ठा थी ।

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Details from  :  “तपोनिष्ठ ब्राह्मणों का ईतिहास” page no.४२ /४३

Photograph : From “Swarn-Prabha” -Jun/July -year 1971

Note :  If you have any  information and real photographs of any great person of our society, please let us send on contact@brahminswarnkar.com or on following address, it will be published here with  The Collectionist name.

अगर आपके पास समाज के कोई भी महान प्रतिभा विशेष के बारे मे जानकारी  एवं तस्वीर हो, तो आपसे निवेदन है कि समाज के हित में समाज  की  जानकारी के लिये उपलब्ध करायें. आप उसे निम्न-लिखित E-mail पर, फोन, या पोस्ट से भेज सकते है ।

Soni Sunderlal Prahladji

283/6, Bawa’s Dehla, Opp; Premdarwaja,

Ahmedabad, Gujarat – INDIA -380002

Email : contact@brahminswarnkar.com

Phone-+91 79 22164380

Mobile 09328241151

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2 Responses to “110 years ago………… A great man ……………….. श्री नारायणदासजी बैरिस्टर”

  1. sudhir soni says:

    Really amazing personality of that era ! Great information… Great website !

  2. vishal soni says:

    he was really great man

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