वैद्यभूषण पं. कल्याणमलजी शर्मा – अजमेर ….

आपका जन्म भुतपूर्व किशनगढ़ राज्य के अंतर्गत सरवाड गाँव में वि. सं. १९५०  में हुआ था.  आपके पिताजी पं. गणेशरामजी सरवाड के विशिष्ट चिकित्सक थे.   बचपन में ही माता पिता और बड़े भाई पं. जगन्नाथजी के देहावसान के कारण आप पर विपत्तियों के पहाड़ टूट पड़े.   विषम परिस्थियों में हताश न हो, आप अथक परिश्रमी और विद्याप्रेमी बन गये.   मात्र सोलह वर्ष की अवस्था में आप सरवाड छोड़कर अजमेर आ गये और यहीं आपका विवाह डीडवाणा निवासी श्री जयदेवजी की पुत्री सूरजबाई से हुआ.   परिवार का दायित्व संभालते हुए भी आप निरंतर अध्ययनरत रहे.   संस्कृत का अध्ययन कर आयुर्वेद का गहरा अभ्यास किया. परिणामस्वरुप वैद्यभूषण आदि कई उपाधियाँ प्राप्त कीं.     अपनी श्रेष्ठ चिकित्सा तथा उत्तम व्यवहार के कारण अत्यंत अल्प समय में ही अजमेर के प्रतिष्ठित वैद्यों में उनकी गणना होने लगी .   २६ वर्ष की अल्पायु में ही पत्नी का देहांत हो गया.   इससे थोड़ी विरक्ति सी आई.   अब अधिक समय आपका ध्यान भगवद्भक्ति व योगाभ्यास में जमने लगा.   दूसरी ओर चिकित्सा क्षेत्र में आपको अधिकाधिक कीर्ति प्राप्त होती रही.   अनेक असाध्य रोगों को आप विशिष्ठ योग क्रियाओं द्वारा मिटा देते थे.   आप अत्यंत सज्जन व निस्पृह व्यक्ति थे .   समाज सेवा के क्षेत्र में भी आपने महत्वपूर्ण योगदान देना आरम्भ किया.   आपके ही संस्कारों के फलस्वरूप आपके भाई के पुत्र श्री राजनारायणजी  एक अच्छे वैद्य बने.

आपके व्यक्तित्व तथा सेवा कार्यों से प्रभावित हो, समाज ने भी आपको जोधपुर महासभा के सभापति बनाकर सम्मानित किया.   सन्  १९३१ में आपका निधन हो गया .